कुदवारी-अमखेरा में हाजी इरशाद की कॉलोनी के निर्माण जमींदोज
पुलिस बल और नगर-निगम का अमला लेकर एसडीएम के साथ पहुंचा एंटी माफिया सेल
जबलपुर। ग्राम अमखेरा में भू-माफिया हाजी इरशाद द्वारा सरकारी सीलिंग की जमीन पर अवैध कब्जा कर बनाई गई सारा सिटी पर आज जिला प्रशासन ने बुल्डोजर चला दिया। नगर-निगम अमला और पुलिस बल लेकर पहुंचे अनुविभागीय दंडाधिकारी की टीम ने मौके पर खड़े होकर कार्रवाई को अंजाम दिया। जिला प्रशासन की एंटी माफिया सेल द्वारा की गई इस कार्रवाई में एसडीएम नम:शिवाय अरजरिया, सीएसपी अखिलेश गौर, तहसीलदार राजेश सिंह, नायब तहसीलदार संदीप जायसवाल, थाना प्रभारी गोहलपुर अरविंद चौबे की मौजूदगी में पांच करोड़ रुपए की कीमत वाली सरकारी जमीन पर लगभग एक करोड़ की लागत से बने मकान-दुकान तोड़ दिए गए। इसके चलते कार्रवाई के दौरान हंगामा भी हुआ, लेकिन पुलिस-प्रशासन के सामने दबंगों की एक न चल सकी। बताया जा रहा है कि हाजी इरशाद नामक भू-माफिया ने यहां सरकारी सीलिंग की जमीनों की खरीद-फरोख्त करने का धंधा शुरु कर रखा है। इसी क्रम में लगभग ढाई से तीन एकड़ के बैल्ट में जो कि सरकारी रिकॉर्ड में सीलिंग में दर्ज है पर सारा सिटी बना रखी थी।
रात में तैयारी, सुबह-सुबह ही पहुंच गया बुल्डोजर ...........
जिला प्रशासन द्वारा इस दौरान हाजी इरशाद के ऊपर सरकारी जमीन पर कब्जा करने का प्रकरण भी दर्ज कर लिया गया है। आज सुबह-सुबह जब सरकारी टीम यहां कार्रवाई करने पहुंची तो बुल्डोजर और पुलिस-प्रशासन का अमला देख कर इलाके में हड़कम्प मच गया। पहले यहां एक दीवार निर्माण और खसरा नंबर 16 और 18 के नाम पर प्रशासन को भ्रमित करने का प्रयास भी किया गया।
हंगामे की थी तैयारी,भारी पुलिस बल देख दुबक गए माफिया के गुर्गे.......
चूंकि कार्रवाई की तैयारी कल शाम से ही की जा रही थी, इसलिए इसकी भनक हाजी इरशाद और उसके गुर्गो को भी रही, लेकिन पुलिस बल की मौजूदगी में उनकी दाल नहीं गल सकी। इस दौरान गुर्गो ने प्रशासन की टीम पर दबाव बनाने की कोशिश की तो अधिकारियों ने गूगल मैप खोल कर खसरा नंबर 16 की सारी स्थिति स्पष्ट कर दी जिसके बाद इरशाद एंड पार्टी की बोलती बंद हो गई। पहले किया गुमराह, सीलिंग की जमीन कब्जाई थी....... बताया जा रहा है कि हाजी इरशाद ने एक जगह खसरा नंबर 16 पर अवैध कब्जा कर सीलिंग की जमीन बेच दी तो दूसरी तरफ खसरा नंबर 18 में भी निर्माण कर लिया। यहां एक दीवार के नाम पर जिला प्रशासन को भ्रमित करने की कोशिश काफी देर की जाती रही, लेकिन ऑनलाइन रिकॉर्ड लेकर पहुंची टीम के सामने गुमराह करने की कोशिश सफल नहीं हो सकी।