भुगतान न होने से हेल्थ सर्विस प्रोवाइडर ने दिया अल्टीमेटम, मेडिकल प्रशासन ने भी खड़े किए हाथ
शहडोल। हेल्थ सर्विस प्रोवाइडर ने शहडोल के मेडिकल कॉलेज में 30 नवंबर से काम बंद करने का अल्टीमेटम दे दिया है। दरअसल, शासन के चिकित्सा शिक्षा और लोक निर्माण विभाग के अफसरों की गलती के कारण इन्हें भुगतान न होने से यह स्थिति बनी है और इसका खामियाजा शहडोल मेडिकल कालेज के मरीज व बच्चों को भुगतना पड़ेगा। शहडोल मेडिकल कालेज में 12 माह से लिफ्ट, डब्ल्यूटीपी, एसटीपी, ईटीपी, सीसीटीवी, फायर, डीजी सेट, एसी, इलेक्ट्रिकल आदि सेवाएं दे रहे सर्विस प्रोवाइडर का भुगतान सरकार ने अब तक नहीं किया है। ये सेवाएं दे रहे सर्विस प्रोवाइडर्स की सेवा अवधि भी 30 नवम्बर को खत्म हो रही है। सर्विस प्रोवाइडर्स ने शहडोल कमिश्नर, डीन मेडिकल कालेज सहित स्थानीय प्रशासन को लिखित में सूचना देकर कहा है कि वे 30 नवम्बर की आधी रात से सेवाएं देना बंद कर देंगे। बताया जाता है कि मेडिकल कालेज में ढाई सौ से अधिक मरीज आमतौर पर भर्ती रहते हैं और तीन सौ से अधिक मरीजों को रोजाना ओपीडी सेवा दी जाती है। ऐसे में लोक निर्माण विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग के अफसरों की लापरवाही के चलते पानी, साफ सफाई और अन्य सेवाओं के बंद होने से मरीजों को दिक्कत होना तय है। सूत्रों का कहना है कि लोक निर्माण विभाग के अधीन इन सेवाओं को लेकर शासन स्तर पर लोक निर्माण और चिकित्सा शिक्षा विभाग के अफसरों के बीच सर्विस प्रोवाइडर्स द्वारा दी जाने वाली सेवाओं को लेकर कोई लिखित करार नहीं हुआ। इस कारण अब भुगतान में दिक्कत हो रही है।
पीडब्ल्यूडी ने कहा- न बजट है और न मैन पॉवर....................
बताया गया कि चिकित्सा शिक्षा आयुक्त ही इस मामले में अंतिम निर्णय लेंगे,लेकिन अब तक कोई समाधानकारक स्थिति सामने नहीं आई है। डीन मेडिकल कालेज डॉ मिलिंद शिरालकर ने स्वीकार किया है कि यदि अनुबंध न बढ़ा और भुगतान न हुआ तो मेडिकल कालेज की सेवाएं प्रभावित होंगी और इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ेगा। उधर लोक निर्माण विभाग ने साफ कर दिया है कि उनके पास न तो बजट है और न ही मैन पावर है कि मेडिकल कालेज की सेवाएं सर्विस प्रोवाइडर के अनुबंध खत्म होने के बाद संचालित किए जा सकें।