नर्मदा सेवा यात्र निकाली फिर भूल गए संकल्प
October 31, 2021
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आज तक मिल रही है गंदगी,एनजीटी के आदेश को अफसर दिखा रहे ठेंगा
प्रति तीन माह में देना थी रिपोर्ट, ताजा रिपोर्ट से हुआ खुलासा,सीएस को लिखा पत्र
जबलपुर। चार साल पहले यानि 6 नवम्बर 2017 को धूमधाम से करोड़ों रुपए खर्च कर राज्य सरकार द्वारा निकाली गई नर्मदा सेवा यात्र के वक्त से ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने यह दिशा-निर्देश जारी कर रखे हैं कि नर्मदा में मिलने वाली गंदगी हर हाल में रोकी जाए। नर्मदा सेवा यात्र का उद्देश्य भी नर्मदा की पवित्रता को अक्षुण्ण बनाए रखने का ही था जिसके लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान स्वयं मैदान में थे। इसके बावजूद भी इस साल 2021 में 16 जुलाई को जब मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की है तो यह प्रमाणित रुप से जानकारी मिली है कि आज तक नर्मदा में गंदगी मिलना बदस्तूर जारी है तो यह कैसी विडम्बना है।
खास बात यह कि जब समूचा शासन-प्रशासन,मंत्रलय इस नर्मदा सेवा यात्र में नर्मदा सफाई-स्वच्छता,संवर्धन आदि-आदि के दावे करता नहीं थक रहा था और दावों तथा घोषणाओं का यह क्रम आज तक बदस्तूर जारी भी है। खास बात यह है कि सरकारी सिस्टम का यह हाल तब है जबकि ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में यह स्पष्ट कर रखा था कि नर्मदा सेवा यात्र योजना के अंतर्गत प्रत्येक विभाग अपने द्वारा किए गए कार्य की प्रगति रिपोर्ट प्रति तीन माह में सौंपेगा यानि दिसम्बर उसके बाद जून और फिर सितम्बर माह के अंत में यह रिपोर्ट सौंपी जाना थी,लेकिन यह तिमाही रिपोर्ट सौंपने तक का काम न तो किसी विभाग ने किया और ना ही शासन-प्रशासन ने इस पर संज्ञान लिया।
यह चर्चा नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के सदस्यों द्वारा प्रमुख रुप से की गई। चर्चा में बताया गया कि नर्मदा को प्रदूषण से मुक्त करने एनजीटी के आदेश का पालन कर फिर से नर्मदा सेवा योजना यात्र पर कार्य किया जाए। इस लक्ष्य को साधने समयबद्ध एक्शन प्लान तैयार किया जाए। इसके लिए कल ही मुख्य सचिव मध्यप्रदेश शासन को भी एक पत्र भेज दिया गया है। बैठक में यह भी तय किया गया है कि ग्वारीघाट,तिलवाराघाट,भेड़ाघाट, मंडला, डिंडौरी,नरसिंहपुर आदि क्षेत्र में नर्मदा सेवा यात्र योजना में शासन को सहयोग दिया जाएगा। बैठक में डॉ. पीजी नाजपांडे, अनिल पचौरी, रजत भार्गव आदि शामिल हुए।
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