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िसानों को ढूंढे नहीं मिल रहा डीएपी-यूरिया, जिम्मेदार कह रहे भरपूर स्टाक!

ाजार में अमानक खाद की भरमार, कीमत निर्धारित नहीं, चारों तरफ मची है लूट उम्मीद की फसल लहलहाने से पहले मुरझाने की ग्राउंड रिपोर्ट डीएपी की बोरी में अंकित-- 1200 यूरिया की तय कीमत----- 267 प्राइवेट में डीएपी की बोरी--- 1500 प्राइवेट में यूरिया की बोरी--- 330 जिंक एवं सल्फर 5 केजी-- 450 जबलपुर। मटर, चना एवं गेहूं की फसल की बोवनी के बीच पूरे जिले में डीएपी के साथ यूरिया का भारी संकट गहराने से किसानों की चिंता दिनों-दिन बढ़ने से खेतों में उम्मीद की फसल लहलहाने से पहले मुरझा रही है। विपणन के गोदाम से लेकर डबल लॉक और सोसायटियों में ‘डीएपी’ नहीं हैं, लेकिन जिम्मेदार अफसर इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं हैं। किसानों तक सरलता से उचित निर्धारित दाम में खाद पहुंचाने के लिए कई विभाग कागजों में सक्रिय है, लेकिन यथास्थिति इससे बिल्कुल विपरीत है। खाद के लिए रोज डबल लॉक और सोसायटी पहुंच रहे किसानों को भरोसा दिलाया जा रहा है कि 8 दिन के अंदर खाद का भारी स्टाक आ रहा है, आप लोग चिंता न करें, बोवनी फिलहाल कुछ दिनों के लिए टाल दें। सियासत से अलग किसान परेशान इधर,तैयार खेत को बोवनी के लिए रोका नहीं जा सकता, इसलिए किसान प्राइवेट डीलर्स से महंगे दाम में खाद खरीदकर बोवनी करने मजबूर हैं। सरकारी गोदामों में एक सप्ताह से खाद नहीं है। खाद लेने के लिए किसान अपनी संबंधित सोसायटी या शहर के बिक्र ी केंद्रों में आते हैं, लेकिन तालाबंद होने की वजह से उन्हें बिना खाद के ही लौटना पड़ रहा है। किसानों को लेकर सियासत भले ही चरम पर है, लेकिन इस मामले की ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि किसान चौतरफा परेशान है। इंतजार खत्म ही नहीं हो रहा प्रदेश सरकार किसानों के लिए कृषि योजनाएं चलाने का दावा कर रही हैं, पर जब किसानों को जरूरत होती है, तो सरकारी गोदामों में खाद का संकट आ जाता है। मटर, चना और गेहूं की बुआई के समय किसानों को डीएपी-यूरिया के लिए परेशानी ङोलना पड़ रही है। कुछ किसान जैसे-तैसे बुआई का काम कर रहे हैं, लेकिन 15 से 20 दिन के बाद फसलों की सिंचाई के समय यूरिया का संकट उनके सामने फिर खड़ा होगा। किसानों को मिलने वाली खाद में कई कंपनियों की खाद का वितरण होना है,जैसे इफको, आईपीएल, सरदार, नवरत्ना एवं कृभको शामिल है। जिले में सिर्फ इफको कंपनी की खाद् का वितरण सिर्फ प्राइवेट दुकान से किया जा रहा,जबकि बाजार में सभी कंपनियों की खाद् की उपलब्धता है। सेवा सहकारी समितियों में बैठे जिम्मेदार बीते 8-10 दिन से खादआने का सिर्फ भरोसा ही दिला रहे हैं। परमिट काट दिए और नगद में बेच दी खाद बोवनी आने के पूर्व किसानों ने सितम्बर माह में खाद के लिए संबंधित सोसायटी से कर्ज लेकर परमिट ले लिया था। कर्ज स्वरुप मिले परमिट में इस बात की गारंटी होती है कि अगर खाद की गोदाम में आवक होगी तो पहले परमिट लिए किसान को खाद का वितरण जाएगा। डबल लॉक से वितरण होने वाली खाद को अधिकारियों ने नगद में पहले ही बेच दी। नगद ब्रिकी में किसान की ऋण-पुस्तिका में खाद का उल्लेख कर वितरण किया गया, जिसका लाभ व्यापारियों ने उठाते हुए स्टाक कर लिया। परमिट वाला किसान परमिट की पर्ची लेकर दर-दर भटक रहा है। प्राइवेट में भरपूर स्टाक कैसे सरकारी गोदाम को छोड़कर प्राइवेट खाद् विक्रेताओं के पास डीएपी के साथ यूरिया का भरपूर स्टाक कैसे है। किसान निजी फर्म से अधिक दाम देकर खाद् खरीद भी रहे हैं और खाद-बीज का कारोबार करने वाले सिंडीकेट बनाकर किसानों को अमानक खाद् भी बेच रहे, जिसे देखने वाला फिलहाल कोई नहीं है। प्राइवेट डीलर से कह रहे हैं कि अभी जिस कीमत में खाद मिल रही है, खरीद लो आने वाले समय में खाद की भारी किल्लत होने वाली है। अफसर नहीं करते हैं मॉनिटरिंग खाद कि क्वालिटी, वजन और कीमत की सत्त मॉनिटरिंग के लिए कृषि विस्तार अधिकारियों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। पनागर, सिहोरा, पाटन, मझौली एवं शहपुरा क्षेत्र में लाखों बोरी डीएपी और यूरिया की खपत है। किसी भी अधिकारी ने आज तक ऐसा कोई प्रकरण नहीं बनाया जिसकी क्वालिटी खराब हो या फिर निर्धारित वजन में कम हो। हजारों टन खाद् विक्रय के बाद भी अभी तक एक भी केंद्र का न तो निरीक्षण हुआ और न ही कार्रवाई।

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